ઓનલાઇન / અન્ય રીતે લવાજમ ભરવા માટે...

CyberSafar Edumedia Store

1. परमतत्व

श्रीकृष्ण भगवान ने महाभारत युध्ध शुरु होने से पहेले अर्जुन को गीताजी का उपदेश दिया था । ईसी लिए श्रीमद् भगवद् गीताजी के बारे में हम कुछ भी सोचें, उसके पहेले हमें गीतागायक श्रीकृष्ण भगवान के मधुर जीवन दर्शन करने की अत्यंत आवश्यकता है । श्रीकृष्ण के बिना गीताजी की बात करना निरर्थक है । महाभारत की अद्भूत कथा को ही कई लोग काल्पनिक मानते है । अत: महाभारत के एक पात्र जैसे श्रीकृष्ण भगवान के अस्तित्व के बारे में शंकाशील हैं ।

हमारे विद्वान लेखक श्री दिनकरभाई जोषी ने अपनी किताब “ कृष्णं वंदे जगदगुरुम् ” में ऐसी शंका को निर्मूल करने के लिए बहुत सुंदर बात लिखी है । आम आदमी को कुछ वर्षों से कुछ लोग जानते हैं और उनके प्रति पूज्यभाव बहुत कम लोगों को होता है । लेकिन श्रीकृष्ण भगवान को हजारों वर्षों से, कोटि कोटि लोग पहचानते हैं और कोटि कोटि लोग अत्यंत प्रेम और श्रध्धा से उनका पूजन करते हैं । यही बात से पता चलता है कि आम आदमी का अस्तित्व अल्पजीवी है, और श्रीकृष्ण भगवान का अस्तित्व ही सही है ।

पुष्पों की सुगंध अद्रश्य होती है, शीतल पवन की लहर अद्रश्य होती है, तेजस्वी चीजों का तेज अद्रश्य होता है, परम आनंद भी अद्रश्य होता है, फिर भी ये सभी के अस्तित्व का हम ईन्कार नहीं कर सकते । उन्हें हम देख नहीं सकते, छू नहीं सकते, फिर भी मेहसूस कर सकते हैं । परमात्मा अद्रश्य है सिर्फ ईसी कारन उनके अस्तित्व का हम ईन्कार नहीं कर सकते ।  उनका अस्तित्व शंका से पर है ।

गुलाब में छिपी हुई सुगंध की तरह, श्रीकृष्ण अद्रश्य होने पर भी, उन्हें कई लोग ढूंढते हैं । शीतल पवन की लहर जैसा, उनका सुकोमल स्पर्श पाने के लिए कई लोग आतुर हैं । घोर अंधकार में भी, वे परम ज्योतिर्मय तेजपुंज की एक झलक पाने के लिए, कई लोग आंखें बीछाये हुए बैठे हैं । श्रीकृष्ण के स्मरण द्वारा, परम आनंद की अनुभूति करने के लिए कई लोग झंखना करते हैं । उनके साक्षात् दर्शन संभव न हो तो, स्वप्न में भी  उनकी एक झलक मिल जाय, ऐसे आशावान लोग है । ध्यान के माध्यम से, समाधि अवस्था में श्रीकृष्ण के दर्शन पाने के लिए कई लोग, जीवन की अंतिम क्षण तक कोशिष करते हैं । ईस तरह, कई लोग श्रीकृष्ण भगवान को परम तत्व मानते हैं ।

श्रीकृष्ण भगवान के अद्भूत परम तत्व को जाननेवाले, किसी अनजान भक्त कवि ने, बहुत सुंदर श्लोक द्वारा स्तुति की है कि –

 “ बंसी विभूषित करात्, नवनीरद आभात्,

पूर्णेन्दु सुंदर मुखात्, अरविंद नेत्रात्,

पीताम्बरात्, अरुणबिंबफल अधरोष्ठात्,

कृष्णात्, परम किम् अपि तत्वम्, अहम् न जाने…”

जिनके करकमलों में बंसी शोभायमान है, जिनके सुंदर शरीर की आभा नये बादलों जैसी घनश्याम है, जिनका सुंदर मुख पूर्ण चन्द्र जैसा है, जिनके नेत्र, कमल की भांति बहुत सुंदर है, जिन्होंने पीताम्बर धारण किया हुआ है, जिनके अधरोष्ठ अरुणोदय जैसा, माने उदित होते हुए सूर्य के लाल फल के रंग जैसा है, ऐसे श्रीकृष्ण भगवान के सिवा और कोई परम तत्व है, यह मैं नहीं जानता ।

परम तत्व किसे कहते हैं ? श्री चैतन्य महाप्रभु की प्रेमभक्ति का प्रसार करनेवाले “ईस्कोन”“कृष्ण  - पूर्ण पुरुषोत्तम परमेश्वर”–    “ लक्ष्मी, शक्ति, किर्ति, सौंदर्य, शाणपण और त्याग, ये छ: ऐश्वर्यों का सुभग समन्वय    जिनमें हो, वह परम तत्व है । ” संप्रदाय के धर्म प्रवर्तक श्री भक्तिवेदांत स्वामीजी ने उनकी किताब में यह बात बहुत सुंदर रुप से समझायी है । उन्होंने लिखा है कि

आम आदमी में उपरोक्त छ: ऐश्वर्यों में से शायद एक या दो ऐश्वर्य देखने को मिले ।

कोई श्रीमंत हो, लेकिन उदार नहीं होता । कोई विद्वान हो, लेकिन निराभिमानी नहीं होता । कोई शूरवीर हो, लेकिन विद्वान नहीं होता । कोई सत्ताधीश हो, लेकिन त्यागी नहीं होता । श्रीकृष्ण जीवन दर्शन ये छ: ऐश्वर्यों के सुभग समन्वय को प्रकट करता है । साधारण रुप से ऐसा सुभग समन्वय जीवन में कहीं नहीं दिखता । यह वास्तविकता का हमें स्वीकार करना ही चाहिये ।

(1)    द्वारिकाधीश होने पर भी, सत्ता के अहंकार से पर और अत्यंत संपत्तिवान होने पर भी, धन से निर्लेप रहकर, अपने दरिद्र मित्र सुदामा का अनन्य प्रेम से आदर सत्कार करनेवाले श्रीकृष्ण

(2)      परम शक्तिवान होने पर भी और कंस, शिशुपाल, भौमासुर जैसे दुष्टों के संहारक होने पर भी, खुद को अनजाने में तीर मारनेवाले जरा पारधी का वध न करके, “ तुम निष्पाप हो, तुम्हारा कल्याण हो । ” कहेनेवाले क्षमाशील श्रीकृष्ण

(3)      परम तेजस्वी और ज्ञानवान होने पर भी, सिर्फ मेरा ही अनुसरण कर, ऐसा दुराग्रह न रखते हुए, अर्जुन को गीता उपदेश के बाद, खुद सोचकर निर्णय लेने को कहेनेवाले श्रीकृष्ण

(4)      परम सौंदर्यवान होने पर भी, संपूर्ण निष्कलंक चारित्र्यवाले श्रीकृष्ण

(5)      महाभारत युध्ध में होनेवाले संभवित विनाश को रोकने के लिए, अंतिम प्रयास के लिए, खुद द्वारिकाधीश होने पर भी, शांतिदूत के रुप में जाने का शाणपण दिखानेवाले श्रीकृष्ण 

(6)      कंसवध के बाद मथुरा का राज्य मिल सकता था, फिर भी उसे त्यागकर कंस के पिता उग्रसेन को देनेवाले और भौमासुर का वध करके, उसका राज्य उसके पुत्र को देनेवाले परम त्यागी श्रीकृष्ण

 उपरोक्त 6 बातें श्रीकृष्ण भगवान परमात्मा है, यह सिध्ध करने के लिए काफी है, फिर भी निम्न लिखित बातें श्रीकृष्ण भगवान परमात्मा है ही, यह निशंक रुप से सिध्ध करती हैं ।

(1)     “मैंने मिट्टी नहीं खायी है,” ऐसा कहेने पर भी, माता यशोदाजी ने जबरदस्ती   मुंह खुलवाने से, मुख में विश्व दर्शन करानेवाले श्रीकृष्ण

 

(2)     कौरवों की राज्यसभा में उपस्थित न होने पर भी, द्रौपदी की शीलरक्षा करके    श्रीकृष्ण सर्वव्यापी है, ऐसा सिध्ध किया ।

 

(3)     भयानक युध्ध रोकने के लिए, शांतिदूत बन के जानेवाले श्रीकृष्ण को बंदी बनाने की योजना दुर्योधन ने बनायी थी । खुद को बंदी बनाने की चेष्टा की चुनौती के रुप में, कौरवों की राज्यसभा में विराटरुप दर्शन करानेवाले श्रीकृष्ण

 

(4)     महाभारत युध्ध शुरु होने से पहेले अर्जुन को महाकाल के स्वरुप का ज्ञान देने के लिए विश्वरुप दर्शन करानेवाले श्रीकृष्ण

 

(5)     श्रीमद् भगवद् गीताजी द्वारा श्रीकृष्ण भगवान ने खुद, परमेश्वर के तत्वज्ञान के बारे में वर्णन किया और मैं सर्वव्यापी हूं और सबकुछ मुझ में व्याप्त है, ऐसा अद्भूत कथन

 

(6)     “जीवन में मैंने सदैव सत्य का आचरण किया हो तो, यह मृत बालक सजीवन हो ।” ने उत्तरा के मृत बालक को सजीवन करके वे परम सत्यवादी हैं, ऐसा सिध्ध किया ।कहेनेवाले श्रीकृष्ण

 

श्रीकृष्ण भक्ति को मधुर रस की उपमा देकर, गुजरात के सुप्रसिध्ध परम भक्त श्री नरसिंह महेताने कहा है कि – " श्रीकृष्ण भक्ति के सुमधुर रस का स्वाद, भगवान  श्री शंकर याने महादेवजी, 18 पुराण लिखनेवाले भगवान श्री वेदव्यास के सुपुत्र परम ज्ञानी श्री शुकदेवजी और गोकुल की गोपीयां ही जानती है । "

वे अत्यंत सुमधुर, विरल और परम तत्व, श्रीकृष्ण भगवान को कोटि कोटि प्रणाम करके, हम धन्यता महसूस करें । परम तत्व के बारे में कुछ सोचने के बाद गीताजी के बारे में सोचेंगे । 

Share with friends

Comments
Add New Search
+/-
Write comment
Name:
Email:
 
Website:
Title:
 

3.26 Copyright (C) 2008 Compojoom.com / Copyright (C) 2007 Alain Georgette / Copyright (C) 2006 Frantisek Hliva. All rights reserved."

 

ગમતાંનો ગુલાલ!

સાયબરસફર તમને ગમે છે? તો એની ભલામણ કરો મિત્રો અને સ્વજનોને. ટેલ-એ-ફ્રેન્ડ સર્વિસની મદદથી તમે તમારા વિવિધ ઇમેઇલ, બ્લોગ કે સોશિયલ નેટવર્કિંગ સાઇટના યુઝરનેમ, પાસવર્ડથી લોગ-ઇન થઈને તમારા કોન્ટેક્ટ લિસ્ટના અન્ય મિત્રોને સાયબરસફર વિશે જણાવી શકો છો.

SocialTwist Tell-a-Friend

પણ ગમશે